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ंइग टे ोलॉजी - CITS




           सलवार कमीज़ भारत की मिहलाओं म  ब त लोकि य है  ों िक यह एक ब त आरामदायक पहनावा है जो बदलते मौसम की   ितयों म  भी पहना जा
           सकता है। यह एक ब त सुंदर पहनावा भी है जो औपचा रक आयोजनों, काय  लों, िडनर या पािट यों म  पहना जा सकता है।

           सलवार कमीज़ की िवशेषताएँ
           आमतौर पर सलवार पतलून लंबे और ढीले-ढाले बनाए जाते ह , िजनके  टखनों के  ऊपर संकरी हेम होती है जो स  कफ की तरह िसलाई जाती है,
           िजसम  इंटरिलिनंग 3 इंच चौड़ी रखी जाती है।

           कमीज़ (ऊपरी धड़ का प रधान) घुटने तक लंबी होती है और कभी-कभी म -बछड़े तक भी होती है, िजसम  6 से 8 इंच का  ं ट  ैके ट और उपयोिगता
           के  िलए दो साइड पॉके ट होते ह । फै शन  झान िफटनेस के  िन िल खत  कार िनधा  रत करते ह :

           1  टाइट िफटेड
           2  सेमी िफटेड

           3  मीिडयम िफटेड

           4  ढीली िफिटंग

           सौंदय  बढ़ाने के  िलए गले के  िह े पर प र ृ त कढ़ाई भी की जा सकती है। आ ीन, हेम और साइड   ट पर भी िन िल खत सतही सजावट की जा
           सकती है:
           -  िमरर वक

           -  आ र वक

           -  ज़रदोसी
           -  कढ़ाई की सजावट

           वसंत/ ी कालीन सं ह के  िलए उपयु  साम ी:

           -  कॉटन
           -  कै मि क

           -  वोइल

           -  पॉपिलन

           -  िलनेन
           -  लॉ ग  ॉथ

           साथ ही, िकसी भी नरम से म म वजन के  कॉटन फै ि क भी उपयु  होते ह ।

           शरद ऋतु/शीतकालीन सं ह के  िलए उपयु  साम ी:

           -  िस ,  ोर िस  और आिट िफिशयल िस
           -  िसंथेिटक

           -  जॉज ट

           -   े प
           -  ह े  वजन की ऊन, पॉली िव ोज़, रेयान, जूट









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                                            CITS : प रधान -   ंइग टे ोलॉजी - पाठ 40
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