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ंइग टे ोलॉजी - CITS




           5    ापार िनयम - दो प ों के  बीच िकसी सौदे को सफल बनाने के  िलए कानूनी औपचा रकताएँ  पूरी होनी चािहए।
           6   इ ेमाल िकए गए क े माल की गुणव ा - भेजे जाने वाले उ ादों की गुणव ा िव े ता  ारा इ ेमाल िकए गए क े माल की गुणव ा पर िनभ र
              करती है। ऑड र देने से पहले कं पनी  ारा इसकी जाँच की जा सकती है।

           7   कीमत - अपैरल सोिस ग सौदों म  लागत- भावशीलता एक मह पूण  भूिमका िनभाती है।

           8    ान -  वसाय की िनकटता कभी-कभी आउटसोिस ग सौदे के  भा  को तय करने म  भूिमका िनभाती है।

           फै शन म  बदलते  झान (Changing trends in fashions)

           प रचय

           वैि क फै शन उ ोग के  िलए, भारत हमेशा से एक  मुख बाजार रहा है। भले ही यह असमानता, बुिनयादी ढांचे और बाजार िवखंडन की कई चुनौितयों का
           सामना करता है; यह पूवा नुमान लगाया गया है िक यह  े  मजबूत आिथ क िवकास, पैमाने और बढ़ते िडिजटल  वधान को िदखाएगा। ये सभी त  आने
           वाले समय म  भारतीय बाजार को वैि क  ान बनाएं गे।  रपोट  के  अनुसार, आने वाले वष  म  भारत के  प रधान बाजार का मू  $59.3 िबिलयन (2023)
           होने की उ ीद है और भारतीय फै शन उ ोग दुिनया का छठा सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरेगा। भारतीय फै शन उ ोग ने महामारी की   ित से काफी
           संघष  देखा है। हालाँिक, अब जब यह   ित बेहतर होने के  साथ पुनज िवत हो रहा है, तो उ ोग अगले साल की ओर बढ़ने के  िलए पूरी तरह तैयार है।
           भारत के  फै शन D2C (डायरे -टू -कं  ूमर)  ेस म  उभरती अवधारणाएँ

           1   D2C फै शन  ांड्स म  वृ

           भारतीय उपभो ाओं के  नए समूह की  े ताी की आदत बदल गई है और अब वे के वल D2C फै शन  ांड्स से ही  े ताी करते ह । फै शन  ांड D2C मॉडल
           का उपयोग करके  ब त अ ा  दश न कर सकते ह   ों िक यह उ   उपभो ा डेटा तक पूरी प ँच,  ाहक अनुभव पर बेहतर िनयं ण और  ांड िन ा
           को बढ़ावा देने और उसका लाभ उठाने का अवसर देता है। इस वजह से,  वसायों को  ाहकों से जुड़ने, उनके  सवालों के  जवाब देने और उनसे जुड़ने
           के  िलए चैटबॉट का उपयोग करने की पूरी आज़ादी है। इसके  कारण, चैटबॉट का एक और अनु योग,  वसाय सीधे  ाहकों को सामान और सेवाएँ
            दान करने के  िलए  ाट्सएप, फे सबुक, ई-मेल और इं ा ाम जैसी िविभ  सोशल मीिडया साइटों का भी उपयोग कर रहे ह ।

           2   D2C  वसायों के   ित उपभो ाओं का  झान
           आज के  युग म , उपभो ा मु   प से इंटरनेट फै शन पर िनभ र करते ह   ों िक यह आसानी से सुलभ, सुिवधाजनक है और त ाल संतुि   दान
           करता है। अ  उ ोगों की तुलना म , यह पाया गया है िक फै शन म  रसद के  मामले म  बढ़त है - भारत भर म  हजारों  े ों म  िशिपंग, जो कभी-कभी
           िवशेष  प से उ  अंत घिड़यों, आभूषणों, इले  ॉिन  और फन चर के  मामले म  ज री नहीं है। सोशल मीिडया के  िवकास के  कारण,  ाहक अपनी
           ज़ रतों के  बारे म   ादा सि य ह  और सीधे उपभो ा (D2C) चैनलों पर चलने वाले नए  े ीय  ांडों की खोज करने के  िलए खुले ह । इसने D2C और
           नए  ाट -अप  ांडों के  िलए फै शन उ ोग म   ािपत  ांडों के  साथ  ित धा  करना संभव बना िदया है।

           3   उपभो ा आधार का िव ार

           फै शन D2C  ांड िटयर I शहरों (100,000 और उससे  ादा) म  अ ी द ता के  साथ िव ार करने के  बाद िटयर II (जनसं ा 50,000 से 99,999)
           और िटयर III शहरों (जनसं ा 0,000 से 49,999) म  अपनी उप  ित और मू  बढ़ाने की तलाश म  ह , छोटे शहरों म  संभावनाएँ  ह , और  वसायों
           को अपने उपभो ा आधार को खोजने और उसका िव ार करने के  िलए इसका उपयोग करना चािहए। वे अपने  ित ंि यों से हमेशा एक कदम आगे
           रहने के  िलए नए और िवकासशील  झानों का अनुसरण करने के  िलए  मुखता से काम कर रहे ह , व ुओं का िनजीकरण बढ़ रहा है। िपछले 2 वष
           म , D2C  ांड िन ंदेह जुड़ाव को बढ़ाने और अिधक  ाहकों को लाने म  स म रहे ह , लेिकन अगली चुनौती उ   बनाए रखना और उनकी वफ़ादारी
           बनाए रखना होगा।
           भारतीय फै शन उ ोग म  उभरते  झान

           1     रता

           कोिवड-19 के  बाद  ह के  भिव  के  बारे म  िचंितत होना एक    बात है। आज के  दौर म  वे  ांड मांग म  ह  जो पया वरण के  अनुकू ल और िटकाऊ
           कपड़े और ए ेसरीज़ पर  ान क   ि त कर रहे ह । जब फै शन उपभो ाओं की बात आती है तो यह िनि त  प से सबसे मह पूण  पहलू है  ों िक
           यह उनके  खरीद  वहार को काफी हद तक  भािवत कर रहा है।



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                                            CITS : प रधान -   ंइग टे ोलॉजी - पाठ 29
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